Reliance Power का नाम लंबे समय तक शेयर बाज़ार की गुमनियों में खोया हुआ था। कभी इस कंपनी को भारत की ऊर्जा क्रांति का चेहरा माना गया था, लेकिन 2008 के बाद इसकी स्थिति डगमगाने लगी थी। निवेशकों ने इस कंपनी से नज़रें हटा ली थीं और Anil Ambani के नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे थे। पर अब 2025 में तस्वीर बदलती दिख रही है। कुछ ही महीनों में Reliance Power का शेयर आसमान छूने लगा, कंपनी के नाम पर मीडिया में खबरें बननी शुरू हुईं, और एक बार फिर निवेशकों ने इसमें संभावनाएं देखनी शुरू कर दीं।
Reliance Power की चौंकाने वाली वापसी
2025 की शुरुआत से ही Reliance Power के शेयर ने जबरदस्त रिटर्न देना शुरू कर दिया। मार्च से जून के बीच इसने करीब 130% से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की। शेयर ने ₹67.68 का 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर छू लिया। इसने न सिर्फ पुराने निवेशकों को राहत दी, बल्कि नए निवेशकों में भी FOMO यानी ‘Fear of Missing Out’ जैसी भावना को जन्म दिया। सबको यह लगने लगा कि यह वही अवसर है जिसका इंतज़ार वर्षों से किया जा रहा था।
इस तेजी के पीछे कई बड़ी घोषणाएं थीं। कंपनी ने एक महत्वपूर्ण ₹348 करोड़ की preferential allotment की जिसमें प्रमोटरों और सहयोगियों ने हिस्सेदारी ली। इससे यह संदेश गया कि कंपनी की लीडरशिप में आत्मविश्वास है और वे इसकी संभावनाओं पर भरोसा कर रहे हैं।
इसके साथ ही कंपनी ने भारत के सबसे बड़े Solar+BESS प्रोजेक्ट की योजना सार्वजनिक की। करीब ₹10,000 करोड़ के निवेश से बनने वाला यह प्रोजेक्ट न केवल कंपनी की ऊर्जा क्षेत्र में वापसी का प्रतीक था, बल्कि यह दिखाता था कि Reliance Power अब क्लीन एनर्जी सेक्टर की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है।
Reliance Power: कर्ज में भारी कमी (FY20 से FY25)
वित्त वर्ष 2025 में Reliance Power ने अपने working capital cycle में उल्लेखनीय सुधार किया। कंपनी ने state utilities से बकाया राशि की वसूली को तेज किया और साथ ही corporate overheads को भी कम किया। ये ऐसे कदम हैं जो आमतौर पर मीडिया की सुर्खियों में नहीं आते, लेकिन sustainable profits हासिल करने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। FY20 से लेकर FY25 के बीच कंपनी ने अपने कुल कर्ज को लगातार घटाया, जो इसे भविष्य में एक मजबूत वित्तीय आधार देने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।

Q4 में मुनाफे की वापसी और बाज़ार की प्रतिक्रिया
लंबे समय बाद कंपनी ने Q4 FY25 में मुनाफा दर्ज किया, जो इस रैली को और बल देने वाला कारक बना। कोर्ट से भी कंपनी को एक बड़ी राहत मिली जिससे वह सरकारी टेंडर्स में भाग लेने योग्य बन गई। इन सब सकारात्मक घटनाओं ने मिलकर एक ऐसा माहौल बनाया जिसने शेयर की कीमत को दिन पर दिन ऊपर ले जाने का काम किया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कंपनी के turnaround के पीछे केवल announcements नहीं हैं, बल्कि उसमें कुछ ठोस आधार भी हैं। कंपनी ने debt restructuring शुरू की, परियोजनाएं pipeline में हैं, और लीडरशिप की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि वे इसे गंभीरता से एक growth engine में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
Technical Indicators और बाजार की चाल
जब किसी शेयर में इतनी तीव्र गति से बढ़त आती है, तो बाजार तकनीकी विश्लेषण पर भी ध्यान देता है। Reliance Power का शेयर 20, 50, 100 और 200 दिन के moving averages से ऊपर ट्रेड कर रहा था, जो कि एक मजबूत technical signal माना जाता है। लेकिन हाल ही में यह 5-day average से नीचे फिसला। इसी के साथ ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी असामान्य वृद्धि देखी गई, जो बाजार में speculative trading की ओर इशारा करती है।
Technical charts पर यह एक ऐसा पैटर्न बना रहा था जिसमें उछाल के बाद कुछ correction expected थी। लेकिन correction से पहले ही National Stock Exchange ने इस पर नजर डालनी शुरू कर दी और फिर NSE ने इसे Additional Surveillance Measures यानी ASM की लिस्ट में डाल दिया।
NSE ASM लिस्ट में शामिल होने का मतलब क्या है?
ASM एक निगरानी प्रणाली है जिसे NSE तब लागू करता है जब किसी स्टॉक में असामान्य गतिविधियाँ पाई जाती हैं। यह कोई दंड नहीं है, बल्कि यह निवेशकों के हित की रक्षा के लिए एक कदम है। ASM में जाने का अर्थ होता है कि उस स्टॉक पर अब ट्रेडिंग के नियम सख्त होंगे। इसमें margin trading को रोका जा सकता है, intraday ट्रेडिंग पर पाबंदी लगाई जा सकती है, और circuit limits को कड़ा किया जा सकता है।
Reliance Power का ASM में जाना यह दर्शाता है कि बाजार नियामकों को इस शेयर में हो रही गतिविधियाँ स्वाभाविक नहीं लगीं। शायद वे यह मान रहे हैं कि इसकी कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं, बिना उतने ही तेज़ी से बढ़ते fundamentals के।
यह एक गंभीर संकेत होता है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो बिना जानकारी के सिर्फ कीमतों की तेजी देखकर शेयर में निवेश करते हैं।
क्या यह एक Bull Trap है?
जब कोई स्टॉक तेजी से ऊपर जाता है और फिर उतनी ही तेजी से गिरता है, तो उसे bull trap कहा जाता है। ऐसे मामलों में रिटेल निवेशक सबसे अधिक नुकसान उठाते हैं क्योंकि वे अक्सर उंची कीमत पर खरीदते हैं और जब correction आता है तो बेचने का निर्णय नहीं ले पाते।
Reliance Power के मामले में यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है। क्या यह तेजी टिकाऊ है? क्या announcements वाकई में execution तक पहुंचेंगी? ₹10,000 करोड़ का Solar+BESS प्रोजेक्ट ambitious जरूर है, लेकिन क्या इसे समय पर और बजट के अनुसार पूरा किया जा सकेगा?
इन सवालों का उत्तर आने वाले दो-तीन तिमाहियों में मिलेगा। यदि कंपनी मुनाफा बनाए रखती है, debt कम करती है, और अपने clean energy प्रोजेक्ट्स को ठोस ज़मीन पर उतारती है, तो यह तेजी वाजिब मानी जाएगी। लेकिन अगर प्रोजेक्ट्स अटकते हैं, execution में देरी होती है, या funding की दिक्कत आती है, तो यह तेजी मात्र एक बुल ट्रैप साबित हो सकती है।
निवेशकों के लिए सही रणनीति क्या होनी चाहिए?
जो निवेशक पहले से इसमें शामिल हैं और उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ है, उनके लिए यह सही समय हो सकता है कि वे आंशिक मुनाफा निकालें और बाकी हिस्से को long-term के लिए होल्ड करें। इससे उनका मूलधन सुरक्षित रहेगा और वे कंपनी की भविष्य की वृद्धि में भी हिस्सेदार बने रहेंगे।
वहीं नए निवेशकों के लिए अभी थोड़ा रुकना समझदारी हो सकता है। जब कोई स्टॉक ASM के तहत आ जाता है, तो उसमें short-term में trading करना जोखिमपूर्ण हो जाता है। liquidity घट सकती है और सख्त नियमों की वजह से volatility बढ़ जाती है।
इस समय एक समझदार निवेशक वही है जो केवल तेजी देखकर decision न ले। बजाय इसके, उसे कंपनी की quarterly performance, debt structure, project updates और बाजार की broader दिशा पर नज़र रखनी चाहिए।
Reliance Power: उम्मीद और जोखिम के बीच एक नाजुक संतुलन
Reliance Power की मौजूदा स्थिति एक शानदार कहानी का आरंभ हो सकती है। लेकिन हर आरंभ सफल नहीं होता, यह भी ध्यान रखना चाहिए। कंपनी ने एक साहसिक प्रयास शुरू किया है—clean energy के क्षेत्र में बड़ा निवेश, नए प्रोजेक्ट्स, debt restructuring और promoter trust दिखाना। लेकिन यह एक लंबी दौड़ है और इसमें सफल वही होता है जो स्थिरता के साथ दौड़ सके।
NSE की ASM चेतावनी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह एक गहरा संकेत है कि regulatory bodies सतर्क हैं और निवेशकों को भी अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है।
यदि आप एक दीर्घकालिक निवेशक हैं और आप कंपनी की परियोजनाओं में विश्वास करते हैं, तो हो सकता है कि यह रैली आपको आकर्षक लगे। लेकिन short-term profit seekers के लिए यह समय सावधानी का है।
निष्कर्ष: क्या Reliance Power में अब भी भरोसा किया जा सकता है?
शेयर बाजार में निवेश का फैसला भावनाओं से नहीं, तथ्यों से किया जाना चाहिए। Reliance Power की मौजूदा तेजी ने बाजार को चौंकाया है, लेकिन इसकी टिकाऊ क्षमता पर सवाल भी खड़े किए हैं।
एक बात तय है: आने वाले महीनों में कंपनी के performance, execution और regulatory updates इस शेयर की दिशा तय करेंगे। निवेशक यदि सतर्क रहें, तो यह एक बड़ा अवसर भी साबित हो सकता है और यदि जल्दबाज़ी की, तो यही रैली एक गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है।













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