भारतीय शेयर बाजार में आज एक बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया। सेंसेक्स 1,200 अंकों की गिरावट के साथ 79,255 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 359 अंकों की गिरावट के साथ 23,986 पर आ गया। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
गिरावट के प्रमुख कारण
1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों पर दबाव डाला है। हालिया महंगाई के आंकड़े संकेत देते हैं कि ब्याज दरों में कटौती की गति धीमी हो सकती है। इसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला, खासकर आईटी और ऑटो सेक्टर पर।
2. वैश्विक बाजारों का दबाव
एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुझान और अमेरिकी बाजारों की कमजोरी ने भी भारतीय बाजार को प्रभावित किया। निवेशकों में जोखिम लेने की इच्छा कम हो गई है, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
सेक्टोरल प्रदर्शन: आईटी और ऑटो सेक्टर में भारी गिरावट
1. आईटी सेक्टर पर असर
आईटी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।
- इंफोसिस (INFOSYS), टीसीएस (TCS) और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) के शेयर 2% से अधिक टूटे।
- निफ्टी आईटी इंडेक्स (NIFTY IT Index) में 2.3% की गिरावट दर्ज की गई।
आईटी कंपनियां अमेरिकी बाजार से बड़ा रेवेन्यू कमाती हैं। इसलिए, अमेरिकी फेड की नीतियों का इन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
2. ऑटो सेक्टर Auto Sector की हालत
ऑटोमोबाइल सेक्टर भी दबाव में रहा।
- मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई।
- ऑटो सेक्टर की गिरावट के पीछे डिमांड में कमी और इन्वेंट्री का बढ़ना प्रमुख कारण हैं।
छोटे और मझोले शेयरों में खरीदारी का रुझान
बड़ी गिरावट के बावजूद छोटे और मझोले शेयरों में खरीदारी देखी गई।
- बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.18% की बढ़त।
- बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 0.70% की तेजी।
हालांकि, यह बढ़त प्रमुख सूचकांकों की गिरावट की भरपाई नहीं कर सकी। कुल मिलाकर, बाजार पूंजीकरण में लगभग 1.52 लाख करोड़ रुपये की कमी हुई।
निफ्टी के लिए तकनीकी दृष्टिकोण: 24,000 का स्तर अहम
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण समर्थन है। इसके नीचे बंद होने से और गिरावट की संभावना बढ़ सकती है।
- निकट भविष्य में निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर अगला समर्थन होगा।
- निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें और अपने पोर्टफोलियो में बदलाव सोच-समझकर करें।
वैश्विक बाजारों का असर
1. एशियाई बाजार
एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुझान देखने को मिला।
- जापान और हांगकांग के बाजारों में हल्की बढ़त।
- चीन और कोरिया के बाजारों में कमजोरी।
2. अमेरिकी बाजार
अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों से जुड़ी चिंताओं ने वहां के बाजारों को कमजोर किया। इसका प्रभाव भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह
- दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखें: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है।
- डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो Diversified Portfolio बनाएं: विभिन्न सेक्टर में निवेश से जोखिम कम होता है।
- तकनीकी स्तरों पर नजर रखें: निफ्टी और सेंसेक्स के अहम स्तरों का ध्यान रखें।
भारतीय शेयर बाजार आज बिकवाली के दबाव में रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू बाजारों पर पड़ा है। निवेशकों को मौजूदा परिस्थितियों में सतर्कता बरतनी चाहिए और लंबी अवधि के निवेश के लिए उपयुक्त रणनीति अपनानी चाहिए।













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